मैं एक बार में ही सब जी लेना चाहता हूँ

अगर मैं एक कवि होता
तुम्हारे होंठो के मधु को
अपनी कविताओं के बिम्बों में भर देता
अगर मैं एक शिल्पकार होता
तुम्हारी आँखों में दिखते प्रेम-निर्झर से लेकर नीरवता
अपनी मूर्तियों के मुख पर सजा देता
अगर मैं एक संगीतकार होता तो
तुम्हारी मुस्कान की खनखनाहट से
विरह राग के आँसू पौंछ देता
अगर मैँ एक चित्रकार होता तो
तुम्हारे साथ बितायी उस साँझ को
अपनी तस्वीरों के रंगों में भर देता
अगर मुझे नृत्य में माहरत होती तो
तुम्हारे लिए मेरी हर भावना को
किसी नर्तकी सा मुद्राओं में ढाल देता

और अगर मैं एक यात्री होता तो
तुम्हारे हाथ थामने के एहसास को
एक टैटू में बिंधवा लेता

किन्तु मैं एक साधारण आदमी हूँ
मेरी कामनाएँ भी मुझ सी ही साधारण हैं
मैं तुम्हारे होंठो के मधु से मदहोश होकर
हर शाम उस पहाड़ी पर बैठना चाहता हूँ
तुम्हारे साँझ से रंग में अपने स्वप्नों का रंग घोलकर
प्रेम का एक नया रंग बनाना चाहता हूँ
तुम्हें बाँहों में भरकर
तुम्हारी मुस्कान के गुँजार को सुनता हुआ
मैं खुद को बार-बार भूल जाना चाहता हूँ
और जिस तरह मैं बिना डरे तुम्हारे समीप आ गया था
उसी तरह, तुम्हारी आँखों में दिखते प्रेम-निर्झर में हर बार
मैं निडर होकर उतर जाना चाहता हूँ
मुझमें तुमसा धैर्य नहीं कि मैं कल तक का इन्तजार करूँ
मैं एक बार में ही सब जी लेना चाहता हूँ . … कवि

©Copyrights

One thought on “मैं एक बार में ही सब जी लेना चाहता हूँ

  1. एक साधारण व्यक्ति की साधारण सी चाह… जी लेना अपनी जिंदगी के सभी हसीन पल.. बिना किसी इंतजार के… 😍❤️

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